सस्ते, सुलभ, घरेलू आयुर्वेद के अचूक उपाय जानिये।

आयुर्वेद के अचूक उपाय

      विश्व स्वास्थ संकट को देखते हुए इसके संरक्षण की महती आवश्यक है। स्वास्थ को संरक्षित, सुरक्षित, दीर्घ जीवनकाल ओर निरोग रखना आति आवश्यक है। आज इसकी पूर्ति आयुर्वेद से ही संभव है क्योकि आयुर्वेद संपूर्ण जीवन का विज्ञान है।आयुर्वेद ही वह कला है जो जीवन जीने की कला को प्राथमिकत़ा देती है।

दैनिक जीवन मे स्वस्थ रहने के लिए कुछ महत्तवपूर्ण तथ्य प्रस्तुत कर रहा हुँ
गौ मूत्र :

  1. जलोदर के रोगी के लिए गोमूत्र तथा पच्चगव्य का सेवन लाभदायक होता है।
  2. गोमूत्र को जितनी बार छानकर पीये उतनी बार पेट साफ होता है।
  3. चर्म-रोगी के लिए गोमूत्र में स्नान करना चाहिए।
  4. स्नान के बाद साबुन का प्रयोग नही करना चाहिए।
  5. लगातार दाई तोला गोमूत्र पीने से पथरी भी कट जाती है। कुछ ही दिनो मे।
  6. प्रातः काल गोमूत्र से आँखे धोनी चाहिए। इससे दृष्टि तेज होती है। ओर चश्मा उतर जाता है।
अदरक :
  1. भोजन से पूर्व अदरक के छोटे-छोटे टुकडो मे नमक ओर नीबू रस मिलाकर सेवन करने से भोजन शीघ्र ही पच जाता है।
  2. अदरक के सेवन से खाँसी में आराम मिलता है।
  3. अदरक को शाक दाल में डालने से पेट सफा रहता है।
  4. श्वास के रोगी को सदा अदरक का रस तथा शहद मिलाकर गुनगुना कर सेवन करना चाहिए।
  5. अदरक के रस का सेवन निमोनिया में लाभदायक होता है।
हरड़ : 
  1. घी के साथ हरड़ चूर्ण का सेवन करने से हदय रोग मे लाभ मिलता है। प्रतिदिन शहद के साथ हरड़ का सेवन शाक्तिदायी होता है।
  2. सोते समय शक्कर के साथ हरड़ चूर्ण दूध मे लेने से कब्ज की समस्या नही होती है।
  3. हरड़ चूर्ण के साथ मक्खन मिश्री का सेवन मेधा शाक्ति बढ़ाने वाला होता है।
  4. हरड़ को गोमूत्र में भिगोकर नमक लगाकर मिट्टी के तवे पर धीरे-धीरे दो-तीन घंटो तक मध्य आँच पर सेकने से हरड़ हलकी हो जायेगी।
  5. इसको ठण्डा होने पर डिब्बे मे रख ले, फिर तीन बार एक-एक चम्मच सेवन करने से श्वास रोग मे लाभदायक होता है।
अजवायन :
  1. अजवायन का चूर्ण नित्य तीन मिली ग्राम की मात्रा से सेवन करने से मिट्टी या कोयला खाने की आदत दूर हो जाती है।
  2. अजीर्ण होने पर इसका सेवन लाभकारी होता है।
  3. अजवायन की नियामित सेवन से अफीम खाने की लत छूट जाती है।
  4. अजवायन को जल मे गर्म करके उसके जल से घावो को साफ कर सकते है यह एंटीसेपटीक घोल से भी बेहतर कार्य करता है।
  5. वायरल ज्वरो में अजवायन का प्रयोग लाभकारी होता है।
दालचीनी :
  1. मुख मे रखकर चबाने से मुख रोगो का नाश होता है।
  2. चर्म रोगो में छाल घिसकर लेप लगाने से लाभ मिलता है।
  3. दन्त कोटर ओर शूल मे इसके तेल का प्रयोग लाभदायक होता है।
  4. क्षय रोगो के कारण बलगम मे खून आना इसके प्रयोग से रूक जाता है।
  5. सोठ के साथ सर्दी जुकाम मे इसका काढा लाभदायक होता है।
  6. पुरानी खाँसी मे दालचीनी, सौफ, मुलहठी, व मुनक्का इन सब को मिलाकर चूर्ण अथवा गोली के रूप मे लेने से शीघ्र आराम मिलता है।
  7. इसका नियमित सेवन जीवनीशाक्ति वर्धक है रक्त का शोधन करता है इसके प्रयोग से वायरसजन्य रोगो से सुरक्षा गिलती है।
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धन्यवाद

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