मोदी जी की अध्यात्म सोच

आध्यात्म सोच


मोदी जी की अध्यात्म सोच

      धर्म और अध्यात्म क्षेत्र पर पुरूष का अधिकार बहुत समय से चला आ रहा है। फलतः वहाँ पाखण्ड और भ्रम जंजाल के आतिरिक्त और कुछ बच ही नही रहा है। मलीनता धोने वाले साबुन की बट्टी यदि कोयले के चूरे से बनने लगी हो तो स्वच्छता का लक्ष्य कभी भी पूरा ना हो सकेगा। इस क्षेत्र मे नारी को ही नेतृत्व करना चाहिए। ईश्वर ने असकीआरम्भिक संरचना दिव्यता की अजस्त्र मात्रा का समावेश करते हुए ही की है। आज की गई बीती |स्थिति मे भी वह आदर्शवादिता एंव अत्क्रष्टा का निर्वाह पुरूष की तुलना मे असंख्य गुनी श्रेष्ठता के साथ निभा रही है। यह उसकी सहज प्रकृति ओर ईश्वर प्रदत्त विशिष्ट विभूति है। पुरूष बहुत श्रम करके जो आध्यात्मिक स्थिति प्राप्त कर सकता है, वह नारी को अनायास ही अपलब्ध रहता है। आस्तिकता, आध्यात्मिकता ओर धार्मिकता के जो लक्षण तत्वदर्शियो ने बताये है, उनमे से अधिकांश को नारी के सहज स्वभाव मे समाया हुआ देखा जा सकता है। हम ऐसे उज्वल भविष्य के सपने देखते है, जिनमे अगले दिनो नारी संसार के भावना क्षेत्र का नेतृत्व कर रही होगी ओर भौतिक क्षेत्र मे सुव्यवस्था की सुदृढ़ नींव रख रही होगी।
हमे इस सोच को आगे बढाना होगा ताकी आध्यात्मिक क्षेत्र मे हमे सफलता और उन्नति प्राप्त हो सके। तथा हमारा जीवन सुखी बन सके।
       इसी सोच को बढाने के लिए मोदी जी ने उत्तराखण्ड मे केदारनाथ धाम मे मोदी जी ने इस को बढावा दिया ताकि भारत मे आध्यतम का ज्ञान भारत तथा अन्य विदेशी भी इसका लाभ उठा सके ओर भारत को उन्हें करीब से जानने का मोका मिल सके। तथा भारत का अर्थशास्त्र मजबूत हो सके।
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धन्यवाद

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