पाँच मोटिवेशनल स्टोरी

किसान के आलसी बालक

एक गांव में एक गरीब किसान रहता था। जिसका नाम रामलाल था। वह किसान अपनी पत्नी और अपने चार बच्चो के साथ रहता था। रामलाल खेतों में मेहनत करके अपना और अपने परिवार वालो का पेट पालता था। लेकिन उसके चारो लड़के बड़े ही आलसी थे।

जो गांव में वैसे ही इधर उधर मस्ती करते घूमते रहते थे। एक दिन रामलाल ने अपनी पत्नी से कहा की अभी तो मै खेतों में काम कर रहा हूँ। लेकिन मेरे बाद इन लड़को का क्या होगा। इन्होने तो कभी मेहनत भी नहीं करी। ये तो कभी खेत में भी नहीं गए।

रामलाल की पत्नी ने कहा की धीरे धीरे ये भी काम करने लगेंगे। समय बीतता गया और रामलाल के लड़के कोई काम नहीं करते थे। एक बार रामलाल बहुत बीमार पड़ गया। वह काफी दिनों तक बीमार ही रहा।

उसने अपनी पत्नी को कहा की वह चारों लड़को को बुला कर लाये। उसकी पत्नी चारों लड़को को बुलाकर लायी। रामलाल ने कहा लगता है की अब मै ज्यादा दिनों तक जिन्दा नहीं रहूँगा। रामलाल को चिंता थी की उसके जाने के बाद उसके बेटों का क्या होगा।

इसलिए उसने कहा बेटों मैने अपने जीवन में जो भी कुछ कमाया है वह खजाना अपने खेतों के निचे दबा रखा है। मेरे बाद तुम उसमे से खजाना निकालकर आपस में बाँट लेना। यह बात सुनकर चारों लड़के खुश हो गए।

कुछ समय बाद रामलाल की मृत्यु हो गयी। रामलाल की मृत्यु के कुछ दिनों बाद उसके लड़के खेत में दबा खजाना निकालने गए। उन्होंने सुबह से लेकर शाम तक सारा खेत खोद दिया। लेकिन उनको कोई भी खजाना नज़र नहीं आया।

लड़के घर आकर अपनी माँ से बोले माँ पिताजी ने हमसे झूठ बोला था। उस खेत में हमें कोई खजाना नहीं मिला। उसकी माँ ने बताया की तुम्हारे पिताजी ने जीवन में यही घर और खेत ही कमाया है। लेकिन अब तुमने खेत खोद ही दिया है तो उसमे बीज बो दो।

इसके बाद लड़को ने बीज बोये और माँ के कहेनुसार उसमे पानी देते गए। कुछ समय बाद फसल पक कर तैयार हो गयी। जिसको बेचकर लड़कों को अच्छा मुनाफा हुआ। जिसे लेकर वह अपनी माँ के पास पहुंचे। माँ ने कहा की तुम्हारी मेहनत ही असली खजाना है यही तुम्हारे पिताजी तुमको समझाना चाहते थे।

सीख: हमें आलस्य को त्यागकर मेहनत करना चाहिए। मेहनत ही इंसान की असली दौलत है I

ईश्वर महनती लोगो की मदद करता है

एक गांव में दो मित्र नकुल और सोहन रहते थे। नकुल बहुत धार्मिक था और भगवान को बहुत मानता था। जबकि सोहन बहुत मेहनती थी। एक बार दोनों ने मिलकर एक बीघा जमीन खरीदी। जिससे वह बहुत फ़सल ऊगा कर अपना घर बनाना चाहते थे।

सोहन तो खेत में बहुत मेहनत करता लेकिन नकुल कुछ काम नहीं करता बल्कि मंदिर में जाकर भगवान से अच्छी फसल के लिए प्रार्थना करता था। इसी तरह समय बीतता गया। कुछ समय बाद खेत की फसल पक कर तैयार हो गयी।

जिसको दोनों ने बाजार ले जाकर बेच दिया और उनको अच्छा पैसा मिला। घर आकर सोहन ने नकुल को कहा की इस धन का ज्यादा हिस्सा मुझे मिलेगा क्योंकि मैंने खेत में ज्यादा मेहनत की है।

यह बात सुनकर नकुल बोला नहीं धन का तुमसे ज्यादा हिस्सा मुझे मिलना चाहिए क्योकि मैंने भगवान से इसकी प्रार्थना की तभी हमको अच्छी फ़सल हुई। भगवान के बिना कुछ संभव नहीं है। जब वह दोनों इस बात को आपस में नहीं सुलझा सके तो धन के बॅटवारे के लिए दोनों गांव के मुखिया के पास पहुंचे।

मुखिया ने दोनों की सारी बात सुनकर उन दोनों को एक – एक बोरा चावल का दिया जिसमें कंकड़ मिले हुए थे। मुखिया ने कहा की कल सुबह तक तुम दोनों को इसमें से चावल और कंकड़ अलग करके लाने है तब में निर्णय करूँगा की इस धन का ज्यादा हिस्सा किसको मिलना चाहिए।

दोनों चावल की बोरी लेकर अपने घर चले गए। सोहन ने रात भर  जागकर चावल और कंकड़ को अलग किया। लेकिन नकुल चावल की बोरी को लेकर मंदिर में गया और भगवान से चावल में से कंकड़ अलग करने की प्रार्थना की।

अगले दिन सुबह सोहन जितने चावल और कंकड़ अलग कर सका उसको ले जाकर मुखिया के पास गया। जिसे देखकर मुखिया खुश हुआ। नकुल वैसी की वैसी बोरी को ले जाकर मुखिया के पास गया।

मुखिया ने नकुल को कहा की दिखाओ तुमने कितने चावल साफ़ किये है। नकुल ने कहा की मुझे भगवान पर पूरा भरोसा है की सारे चावल साफ़ हो गए होंगे। जब बोरी को खोला गया तो चावल और कंकड़ वैसे के वैसे ही थे।

जमींदार ने नकुल को कहा की भगवान भी तभी सहायता करते है जब तुम मेहनत करते हो। जमींदार ने धन का ज्यादा हिस्सा सोहन को दिया। इसके बाद नकुल भी सोहन की तरह खेत में मेहनत करने लगा और अबकी बार उनकी फ़सल पहले से भी अच्छी हुईI

सीख: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की हमें कभी भी भगवान के भरोसे नहीं बैठना चाहिए। हमें सफलता प्राप्त करने के लिए मेहनत करनी चाहिए।

मित्र पर शक मत करो

एक बार की बात है एक गांव में एक बैल रहता था। जिसको घूमना बहुत पसंद था। वह घूमता घूमता जंगल में जा पहुंचा और आते समय गांव का रास्ता भूल गया। वह चलता हुआ एक तालाब के पास पहुंचा।

जहाँ पर उसने पानी पिया और वहाँ की हरी हरी घास खायी। जिसको खाकर वह बहुत खुश हुआ और ऊपर मुँह करके चिल्लाने लगा। उसी समय जंगल का राजा शेर तालाब की ओर पानी पिने जा रहा था।

जब शेर ने बैल की भयानक आवाज़ सुनी तो उसने सोचा जरूर जंगल में कोई खतरनाक जानवर आ गया है। इसलिए शेर बिना पानी पिए ही अपनी गुफा की तरफ भागने लगा। शेर को इस तरह डर कर भागते हुए 2 सियार ने देख लिया

वह शेर के मंत्री बनना चाहते थे। उनने सोचा यही सही समय है शेर का भरोसा जितने का। दोनों सियार शेर की गुफा में गए और बोले हमने आपको डर कर गुफा की ओर आते हुए देखा था। आप जिस आवाज़ से डर रहे थे वह एक बैल की थी।

यदि आप चाहे तो हम उसको लेकर आपके पास आ सकते है। शेर की आज्ञा से दोनों बैल को अपने साथ लेकर आ गए और शेर से मिलाया। कुछ समय बाद शेर और बैल बहुत ही अच्छे मित्र बन गए।

शेर ने बैल को अपना सलाहकार रख लिया। यह बात जानकर दोनों सियार उनकी दोस्ती से जलने लगे क्योकि उनने जो मंत्री बनने का सोचा था वह भी नहीं हुआ। दोनों सियार ने तरकीब निकाली और शेर के पास गए।

वह शेर से बोले बैल आपसे केवल मित्रता का दिखावा करता है। लेकिन हमने उसके मुँह से सुना है वह आपको अपने दोनों बड़े सींगो से मारकर जंगल का राजा बनना चाहता है। पहले तो शेर ने विश्वास नहीं किया लेकिन उसको ऐसा लगने लगा।

दोनों सियार इसके बाद बैल के पास गए। वह बैल से बोले शेर तुमसे केवल मित्रता का दिखावा करता है। मौका मिलने पर वह तुमको मार कर खा जायेगा। बैल को यह जानकर बहुत गुस्सा आया और वह शेर से मिलने के लिए जाने लगा।

सियार पहले ही शेर के पास जाकर बोले की बैल आपको मारने के लिए आ रहा है। बैल को गुस्से में आता देख शेर ने सियार की बात सच समझी और बैल पर हमला कर दिया। बैल ने भी शेर पर हमला किया और दोनों आपस में लड़ने लगे। अंत में शेर ने बैल को मार दिया और दोनों सियारों को अपना मंत्री बना लिया।

सीख: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की हमें कभी भी दूसरों के कहने पर अपनी मित्रता पर शक नहीं करना चाहिए। अच्छे मित्र बड़ी मुश्किल से मिलते है।

जानवरो से दोस्ती

एक बार की बात है राधा नाम की एक लड़की अपने पिता के साथ रहती थी। उसकी माँ बचपन में ही गुजर गयी थी। वह अपने घर का काम करती फिर कॉलेज जाती थी। कॉलेज जाते समय वह रोज़ रास्ते में एक जगह पक्षियों को दाना डालती थी।

उसके घर में भी 2 पक्षी थे उनको भी वह रोज़ दाना डालती थी। एक दिन उसको पक्षियों को दाना डालते जमींदार के बेटे ने देख लिया। उसने अपने पिता से जाकर राधा से शादी करने की इच्छा जताई।

जमींदार ने राधा के पिता से बात करके अपने बेटे की शादी राधा से करा दी। राधा अपने साथ घर के पिंजरे के 2 पक्षी भी लेकर ससुराल आ गयी। वह उन पक्षियों को रोज़ दाना डालती थी। राधा की सास को यह बिलकुल भी पसंद नहीं था।

वह उन पक्षियों को परेशान करती थी। वह उनका दाना पानी जमीन में फेंक देती थी। एक दिन राधा की सास ने पक्षियों का पिंजरा ही जमीन पर फेंक दिया। उसे यह करते हुए राधा ने देख लिया

राधा ने मना किया तो उसकी सास ने राधा को ही डॉट दिया। इन सब बातों से राधा परेशान रहने लगी। एक दिन राधा के पति ने परेशानी का कारण पूछा तो उसने सारी बात बता दी। उसके पति ने राधा को पक्षियों की भलाई के लिए उनको पार्क में छोड़ने की सलाह दी। अपने पति के कहने पर राधा ने उन दोनों पक्षियों को बाकि के पक्षियों के साथ पार्क में ही छोड़ दिया।

वह उनको कभी कभी दाना देने पार्क में जाती थी। अब सभी पार्क के पक्षी राधा के अच्छे मित्र बन गए थे। पक्षी अब राधा के घर पर भी आने लगे। राधा की सास को जब यह पता लगा तो वह गुस्सा हुई। वह राधा को उसके मायके छोड़ने के लिए उसको साथ लेकर गयी।

रास्ते में कुछ चोरों ने राधा की सास के गहने चुराने की कोशिश की। तभी राधा के पक्षियों ने आकर चोरों पर हमला किया। जिससे चोर भाग गए। इसके बाद राधा और उसकी सास घर ही लौट आये।

अब राधा की सास की सोच पक्षियों के प्रति बदल चुकी थी। उसने राधा से कहा की अब हम दोनों चिड़ियाँ को दाना देने चला करेंगे और पहले के दो पक्षियों को घर वापिस लेकर आएंगे। यह बात सुनकर राधा बहुत खुश हुई।

सीख: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की हमें जानवरों से अच्छा व्यवहार करना चाहिए

आलसी गधा

एक बार की बात है एक राम नाम का व्यापारी था उसके पास एक गधा था। राम अपना सामान अपने गधे पर लादता और उसको ले जाकर मार्किट में बेचता था। वह मार्किट की जरुरत के हिसाब से दाल, सब्ज़ी, कपड़े और मिठाइयाँ आदि बेचता था। राम अपने गधे का बहुत ख़याल रखता था। वह उसको बहुत अच्छा खाना देता और उसको आराम करने के लिए अच्छी जगह देता था क्योंकि उसको पता था की गधे की वजह से ही वह अपना सामान मार्किट में ले जाकर बेच पाता था। 

लेकिन गधे को काम करना बिल्कुल भी पसंद नहीं था वह आलसी था। वह जितना हो सके काम से बचता ही था। वह तो बस खाना और आराम करना चाहता था। एक दिन जब राम अपने गधे पर दाल, चावल की बोरियाँ मार्किट जाने के लिए लाद चूका था तो गधा आगे बढ़ने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं हुआ ऐसे में राम ने उसको एक छड़ी से मारा जिसके कारण गधे को चलना ही पड़ा।मार्किट पहुंच कर राम को पता चला की मार्किट में अब नमक की बहुत ज़्यादा जरुरत है तो उसने नमक को बेचने का सोचा। वह अगली बार नमक की चार बोरियाँ लेकर मार्किट पहुँचा और उसको बेच दिया तब उसे उसके अच्छे दाम मिले उसने अगली बार और ज्यादा बोरियाँ लेकर मार्किट में बेचने की योजना बनायीं। राम ने अगली सुबह मार्किट में ले जाने के लिए छः बोरियाँ अपने गधे के ऊपर लाद दी लेकिन गधा इतनी बोरियों के बोझ के कारण खड़ा भी नहीं हो पा रहा था I

यह देखकर राम ने 1 बोरी को निकाल दिया जिससे गधा अब ठीक था। राम पांच बोरियों के साथ ही मार्किट की और निकल पड़ा। उनको मार्किट में जाने के लिए एक नदी से होकर गुजरना पड़ता था। उस दिन नदी में पहले की तुलना में ज़्यादा पानी था।

राम अपने गधे को आराम आराम से लेकर नदी पार करने लगा लेकिन बीच नदी में जाकर गधे का पैर एक पत्थर से टकरा कर फिसल गया।जिससे गधा वहाँ गिर गया। यह देखकर राम ने गधे को खींचकर बाहर निकाला और देखा गधे को कोई चोट तो नहीं लगी। नदी से बाहर निकलने पर गधे ने महसूस किया की उसकी पीठ का वज़न बहुत कम हो गया है जिससे वह बहुत खुश हुआ और उसने सोचा यह कोई चमत्कारी नदी है जिसमे पीठ से  वजन कम करने की ताकत है।

राम ने देखा सारा नमक नदी में बह चूका था जिससे वह अपने घर की तरफ़ गधे को लेकर लौट गया। गधे की पीठ का भार भी कम हो गया था और उसको मार्किट भी नहीं जाना पड़ा जिससे गधा बहुत खुश हुआ और घर जाकर उसने खाना खाया और पूरा दिन आराम किया। राम अगले दिन गधे की पीठ पर बोरियाँ लाद कर चलने लगा

गधे ने सोचा कल को पूरा दिन काम नहीं करना पड़ा लेकिन आज फिर काम करना पड़ रहा है। उसने सोचा लेकिन चमत्कारी नदी तो है न जिससे वजन कम होता है। जैसे ही राम और उसका गधा नदी पार करने लगे तब गधा फिर बीच नदी में जाकर बैठ गया। राम इससे बड़ा हैरान हुआ और अपने गधे को खींचकर बाहर निकाला।

अब फिर सारा नमक पानी में बह चूका था। राम को पता चल चूका था गधा अब यह जान बूझकर कर रहा है। वह इसके बाद घर को लौट गए गधा फिर बहुत खुश हुआ क्योंकि उसको उस दिन भी कोई काम नहीं करना पड़ा। अगले दिन राम ने एक तरकीब सोची और वह गधे पर बोरियाँ लादने लगा। गधे को थोड़ा भारी तो महसूस हुआ लेकिन उसने सोचा चमत्कारी नदी तो है न जिससे वह सीधा चल पड़ा।

जब राम और उसका गधा दोनों नदी पार करने लगे गधा फिर अपनी पीठ का भार कम करने के लिए बीच नदी में जाकर बैठ गया। थोड़ी देर के बाद वह जैसे ही खड़ा हुआ तो उसकी पीठ बहुत दर्द करने लगी क्योंकि पीठ का भार बहुत बढ़ चूका था क्योंकि राम ने अबकी बार नमक की जगह कपास बोरी में डाला था।

गधे के पानी में बैठने पर कपास ने सारा पानी सोख लिया और भारी हो गयी। गधा इससे बहुत परेशान हुआ और गधे को इस बढे हुए भार को लेकर अब मार्किट भी जाना पड़ा। अब गधे को सबक़ मिल चूका था। इसके बाद कभी भी गधे ने नदी में बैठने की हरक़त नहीं की।  

 

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है की हमें कभी भी आलस्य नहीं करना चाहिए क्योंकि आलस्य करने का हमेशा नतीजा बुरा ही होता है।

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