इस्लाम का भारत मे आगमन


      इस्लाम का उदय अरब देश मे हुआ और धीरे-धीरे पूरे विश्व मे इसका प्रसार हो गया। सांतवी शताब्दी मे भारत पर अरबो के आक्रमण के बाद भारतीय लोग इस्लाम से परिचित हुए और धीरे-धीरे इस्लाम भारतीय संस्कृति का अंग बन गया।
          यह अरब देश की बात है। वहाँ के मक्का नामक शहर मे सन् 570 ई. मे हजरत मोहम्मद का जन्म हुआ। उस समय अरब मे अनेक छोटे-छोटे कबीले थे जो लगातार एक दूसरे से लड़ते रहते थे। ये लोग बहुत सारे देवी-देवताओं की पूजा करते थे। हजरत मोहम्मद इन कबीलो के बीच आपसी सौहार्द एवं भाईचारा बढाने के लिए यह संदेश देने लगे कि ईश्वर एक है। एक मात्र अल्लाह की सीधे और सरल तरीके से प्रार्थना करनी चाहिए। मोहम्मद साहब ने कहा कि अल्लाह को मानने वाले सब लोग बराबर है और एक है।
          प्रारम्भ मे मक्का शहर के कई लोगो ने मोहम्मद की बातो का विरोध किया था। यहाँ तक की मोहम्मद साहब को मक्का छोड़कर 622 ई. में दूसरे शहर मदीना जाना पड़ा था। इनका यह जाना ‘हिजरत’ कहा जाता है। इसी समय से मुसलमानो का हिजरी सम्वत् प्रारम्भ होता है। धीरे-धीरे अरब के सारे कबीले मोहम्मद साहब की बाते मानने लगे। इस्लाम धर्म अरब देश से प्रारम्भ होकर दुनिया के कई देशो मे फैला। मोहम्मद साहब की मृत्यु 632 ई. मे हुई।
          इस्लाम के तीन बुनियादी सिद्धान्त है – समता, समानता तथा बंधुत्व। इस्लाम धर्म मे लोग मानते है – अल्लाह एक है और वे उनके बन्दे है तथा हजरत मोहम्मद, अल्लाह का पैगाम (सन्देश) लाने वाले पैगम्बर है। मोहम्मद साहब के देहावसान के बाद अरब मे खलीफाओ का प्रभुत्व स्थापित हो गया। खलीफा पैगम्बर के उत्तराधिकारी के रूप मे मुस्लिम जगत के धार्मिक गुरु तथा राजनीतिक प्रशासक होते थे। इन्होने अपना साम्राज्य अरब देश, सीरिया, इराक, ईरान, मिस्र, उत्तरी अफ्रिका तथा स्पेन तक फैलाया।

    मोहम्मद साहब की शिक्षाएँ

    मोहम्मद साहब ने इस्लाम धर्म के मानने वालो के लिए जीवन मे निम्न पाँच सिद्धान्त निर्धारित किये –
    1. कलमा – अल्लाह एक है और मोहम्मद साहब उसके पैगम्बर है।
    2. नमाज – प्रतिदिन पाँच बार नमाज पढ़ना।
    3. रोजा – रमजान के पवित्र महीने ने रोजा (व्रत) रखना।
    4. जकात – अपनी उपार्जित आय का चालीसवाँ हिस्सा गरीबो को सहायतार्थ देना। 
    5. हज – पूरे जीवन मे एक बार मक्का की तीर्थ यात्रा करना। 
    भारत मे इस्लाम धर्म
          भारत मे इस्लाम धर्म समय-समय पर कई तरह से आया व फैला जैसे-अरबो द्वारा भारत पर आक्रमण से, अरब व्यापारियाे के माध्यम से, ईरानी शरणार्थियो और सूफी सन्तो के आने से। भारत मे इस्लाम धर्म के प्रसार के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे –
    1. अरबो का आक्रमण – भारत पर अरबो का पहला आक्रमण खलीफा उमर के समय 636 ई. मे थाना (पशिचमी तट) पर हुआ। यह आक्रमण सफल नही हुआ। इस आक्रमण से भारतीय लोग सबसे पहले इस्लाम धर्म मानने वालो के सम्पर्क मे आए। इसके बाद समय-समय पर भारत पर अरबो का आक्रमण होता रहा। इसमे पूर्ण सफलता मोहम्मद बिन कासिम को प्राप्त हुई। मोहम्मद बिन कासिम ने  712 ई. मे सिंध के शासक राजा दाहिर को पराजित कर सिंध पर अरबो का राज्य स्थापित किया। 
    2. कई अरब व्यापारियो जो इस्लाम धर्म को मानते थे, भारत के पशिचमी तट पर व्यापार करने आते थे। वहाँ के बंदरगाहो मे वे छोटी-छोटी बस्तियाँ बनाकर बसे। राजाओ ने उन्हें बसने मे मदद की। उन्हें अपने घर, गोदाम बनाने के लिए जमीन दी। इन व्यापारियाे के प्रभाव से आस-पास के लोग इस्लाम धर्म से परिचित हुए। 
    3. भारत के उत्तरी हिस्सो मे इस्लाम धर्म की जानकारी ईरानी शरणार्थियो के द्वारा आई। सन् 900 के लगभग ईरान देश पर तुर्क कबीले हमले कर रहे थे। इन हमलो से बचने के लिए कई ईरानी लोग भारत आए। उनमे कई लोग कारीगर थे और कई लोग सन्त थे। कुछ सिपाही भी आए जो भारतीय शासको की सेनाओ मे शामिल हो गए। ये ईरानी लोग मुसलमान थे। इनके सम्पर्क मे आकर बहुत से लोगों को इस्लाम के बारे मे जानकारी मिली।
    4. बारहवी शताब्दी के अंतिम दशक से भारत मे तुर्क लोगों ने अपना राज्य स्थापित किया था। इस समय तक तुर्क लोगों ने अपना राज्य स्थापित किया था। इस समय तक तुर्क लोग भी इस्लाम मानने लगे थे। तुर्को के साथ बड़ी संख्या ने ईरानी, अफगानी, खुरासानी, लोग भी भारत आकर बसे। 
    5. बारहवीं शताब्दी से सोलहवीं शताब्दी के बीच कई ऐसे सन्त हुए। जैसे – कबीर, नानक, तुकाराम, रामानंद जिन्होंने साधारण भाषा मे दोहे और गीत गाए, जो ईश्वर के प्रति भक्ति भाव से भरे थे। इन्ही भक्त सन्तो की तरह कई मुसलमान सन्त भी थे जो सूफी सन्त कहलाते थे। अजमेर के ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती, पंजाब के बाबा फरीद, दिल्ली के निजामुद्दीन औलिया बहुत जाने-माने सूफी सन्त थे।
          सूफी सन्तो के विचार भक्त सन्तो के विचार से मिलते जुलते थे। सूफियो ने इस बात पर जोर दिया कि सच्चे दिल से अल्लाह को प्रेम करना और अपने बुरे कामो पर पश्चाताप करना अल्लाह को पाने का सही तरीका है। इन सन्तो के विचारो की मदद से हिन्दू और मुसलमान लोगों ने एक-दूसरे के धर्म की समान बाते समझी। लोगो के बीच यह विचार बैठने लगा कि एक ही ईश्वर है – उसे अल्लाह, ईश्वर, परमेश्वर, भगवान जैसे नामो से जाना जाता है।
    मिलने जुलने के फायदे 
          जब दो अलग-अलग संस्कृति के लोग आपस मे मिलते है। जो एक-दूसरे से बहुत कुछ सिखते है। जब अरबी लोग भारत आए तो वे अपने साथ वहाँ (अरब) के रिति-रिवाज व धर्म (इस्लाम) लाए। अरबो तथा भारतीयो ने एक-दूसरे से बहुत कुछ सीखा इससे इनके रहन-सहन तथा जीवन मे बदलाव आया। अरबो ने कई भारतीय ग्रन्थो का अरबी भाषा मे अनुवाद किया। 

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